Saturday, August 1, 2009

जा रहे हो , फिर से मुझे रुला रहे हूँ

जा रहे हो , फिर से मुझे रुला रहे हूँ
सपने देखा के दीप बुझा रहे हो

क्यों सुना रहे हो और अब क्यों तरपा रहे हो
हमारी जिंदगी ले के कहाँ जा रहे हो

बता तो दो के हमे छोड़ कर कोनसा सागर पा रहे हो
सागर तो ही है मेरी जिंदगी भी
अब किसको सागर बना रहे हो
न जाओ कहिएं के अब तो है अंदाज़ ऐ रावन और

क्यों इतने कदम दूर जा रहे हो
पास आना है मुश्किल गर तेरा
मुझे फिर किओं नही बुला रहे हो
में पास आना चाहता हूँ तेरे

मुझे किओं दूरी का एहसास दिला रहे हो
क्यों दूर जा रहे हो
क्यों मुस्कुरा रहे हो

किया खुश हो तुम भी या मेरी तरह आंसूं बहा रहे हो

दिल मिएँ किया है तेरे यह जनता हूँ में भी
पर लगता है के तुम भी मेरी तरह कुछ छुपा रहे हो
प्यार है हमारी जिंदगी पर छोड़ के जा रहे हो
क्यों आज मुझे इस ग़म में अब और तरप रहे हो

आजाना जल्दी से ,के दिल लगता नही है तेरे बिन
हमें तो तुम उदास करके जा रहे हो
प्यार तो है मगर ,इस प्यार में तरप रहे हो

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